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पोस्ट मौर्य काल का परिचय

Jun 10, 2025

Overview

इस लेक्चर में पोस्ट मौर्य काल की प्रमुख डाइनैस्टियों, उनकी विशेषताओं और ऐतिहासिक महत्व पर चर्चा की गई।

पोस्ट मौर्य काल का परिचय

  • पोस्ट मौर्य काल मौर्य साम्राज्य के पतन के बाद प्रारंभ होता है।
  • इस काल में दो प्रकार की डाइनैस्टियाँ देखने को मिलती हैं: आंतरिक (भारतीय) और बाहरी (विदेशी)।

आंतरिक डाइनैस्टियाँ

  • शुंग वंश की स्थापना पुष्यमित्र शुंग ने मौर्य सम्राट बृहद्रथ की हत्या के बाद की।
  • पुष्यमित्र शुंग का राजधानी विदिशा थी; अश्वमेध यज्ञ करवाया।
  • शुंग वंश का अंतिम शासक देवभूति, जिसकी हत्या मंत्री वासुदेव ने की।
  • सातवाहन वंश की स्थापना सिमुक ने की, राजधानी प्रतिष्ठान (महाराष्ट्र) थी।
  • सातवाहनों के प्रमुख शासक गौतमीपुत्र सातकर्णि थे; इन्होंने अपने नाम में मातृवंश का नाम जोड़ा।
  • सातवाहन शासकों के समय में अधिकारी महामात्र, महासेनापति, आदि महत्वपूर्ण थे।
  • क्षेत्रीय शासकों को महारथी और महाभोज कहा जाता था।

बाहरी डाइनैस्टियाँ

  • इंडो-ग्रीक शासक उत्तर-पश्चिमी भारत में आए; इनकी पहचान सिक्कों से होती है।
  • इंडो-ग्रीक सिक्कों पर राजाओं की छवि और पहचान अंकित होती थी।
  • सबसे प्रसिद्ध इंडो-ग्रीक राजा मिनेन्डर (मेलिंद) था।
  • शक शासक (शक जातियाँ), मुख्य रूप से मालवा और मथुरा क्षेत्र में सशक्त रहे; शासकों को क्षत्रप कहा जाता था।
  • सबसे विख्यात क्षत्रप शासक रुद्रदामन प्रथम था, जिसने सुदर्शन झील की मरम्मत कराई।
  • पार्थियन और कुषाण शासक भी बाहरी प्रभाव के रूप में आए; कुषाणों में कनिष्क सबसे प्रसिद्ध शासक थे।
  • कुषाणों की राजधानी पुरुषपुर (पेशावर) और मथुरा थी; स्वयं को 'देवपुत्र' की उपाधि दी।

Key Terms & Definitions

  • अश्वमेध यज्ञ — वैदिक काल का प्रसिद्ध राजसूय यज्ञ, शक्तिशाली शासकों द्वारा आयोजित।
  • महामात्र — राज्य का उच्च अधिकारी/मंत्री।
  • क्षत्रप — क्षेत्रीय शासक/गवर्नर (शक शासकों में आम उपाधि)।
  • देवपुत्र — कुषाण शासकों द्वारा धारण की गई उपाधि, जिसका अर्थ 'देवताओं का पुत्र' है।

Action Items / Next Steps

  • सातवाहन, शुंग, शक और कुषाण राजवंशों पर संक्षिप्त नोट्स तैयार करें।
  • संबंधित कालीन सिक्कों एवं स्थापत्य पर NCERT से अतिरिक्त अध्ययन करें।