Overview
इस लेक्चर में पोस्ट मौर्य काल की प्रमुख डाइनैस्टियों, उनकी विशेषताओं और ऐतिहासिक महत्व पर चर्चा की गई।
पोस्ट मौर्य काल का परि चय
- पोस्ट मौर्य काल मौर्य साम्राज्य के पतन के बाद प्रारंभ होता है।
- इस काल में दो प्रकार की डाइनैस्टियाँ देखने को मिलती हैं: आंतरिक (भारतीय) और बाहरी (विदेशी)।
आंतरिक डाइनैस्टियाँ
- शुंग वंश की स्थापना पुष्यमित्र शुंग ने मौर्य सम्राट बृहद्रथ की हत्या के बाद की।
- पुष्यमित्र शुंग का राजधानी विदिशा थी; अश्वमेध यज्ञ करवाया।
- शुंग वंश का अंतिम शासक देवभूति, जिसकी हत्या मंत्री वासुदेव ने की।
- सातवाहन वंश की स्थापना सिमुक ने की, राजधानी प्रतिष्ठान (महाराष्ट्र) थी।
- सातवाहनों के प्रमुख शासक गौतमीपुत्र सातकर्णि थे; इन्होंने अपने नाम में मातृवंश का नाम जोड़ा।
- सातवाहन शासक ों के समय में अधिकारी महामात्र, महासेनापति, आदि महत्वपूर्ण थे।
- क्षेत्रीय शासकों को महारथी और महाभोज कहा जाता था।
बाहरी डाइनैस्टियाँ
- इंडो-ग्रीक शासक उत्तर-पश्चिमी भारत में आए; इनकी पहचान सिक्कों से होती है।
- इंडो-ग्रीक सिक्कों पर राजाओं की छवि और पहचान अंकित होती थी।
- सबसे प्रसिद्ध इंडो-ग्रीक राजा मिनेन्डर (मेलिंद) था।
- शक शासक (शक जातियाँ), मुख्य रूप से मालवा और मथुरा क्षेत्र में सशक्त रहे; शासकों को क्षत्रप कहा जाता था।
- सबसे विख्यात क्षत्रप शासक रुद्रदामन प्रथम था, जिसने सुदर्शन झील की मरम्मत कराई।
- पार्थियन और कुषाण शासक भी बाहरी प्रभाव के रूप में आए; कुषाणों में कनिष्क सबसे प्रसिद्ध शासक थे।
- कुषाणों की राजधानी पुरुषपुर (पेशावर) और मथुरा थी; स्वयं को 'देवपुत्र' की उपाधि दी।
Key Terms & Definitions
- अश्वमेध यज्ञ — वैदिक काल का प्रसिद्ध राजसूय यज्ञ, शक्तिशाली शासकों द्वारा आयोजित।
- महामात्र — राज्य का उच्च अधिकारी/मंत्री।
- क्षत्रप — क्षेत्रीय शासक/गवर्नर (शक शासकों में आम उपाधि)।
- देवपुत्र — कुषाण शासकों द्वारा धारण की गई उपाधि, जिसका अर्थ 'देवताओं का पुत्र' है।
Action Items / Next Steps
- सातवाहन, शुंग, शक और कुषाण राजवंशों पर संक्षिप्त नोट्स तैयार करें।
- संबंधित कालीन सिक्कों एवं स्थापत्य पर NCERT से अतिरिक्त अध्ययन करें।